शिक्षा एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते है मन में पढ़ने की और जीवन में कुछ करने की प्रेरणा जग जाती है दोस्तों आज मै आपको इस लेख के माध्यम से आपको शिक्षा के एक प्रेणादायक कहानी बताने जा रही हु शिक्षा का पाने हक तो सभी का है चाहे जैसा हो शिक्षा किसी के अमीर और गरीब में फर्क नहीं करती है शिक्षा को ग्रहण करना सौभग्य माना जाता है ये कहानी हैएक गरीब बच्चे की जो पढ़ना तो चाहता था लेकिन उसकी घर की हालत बहुत ही बुरी थी घर में खाने को नहीं था पीर भी वह पढ़ना चाहता था
गरीब का बेटा किलेथिन्स की कहानी-shiksha par motivationl story
बहुत समय पहले एक शहर में विकास नाम का बच्चा रहता था वह स्वभाव से बहुत ही दयालु और दूसरों की मदद करने वाला बच्चा था उसका व्यवहार बहुत ही अच्छा था वह रात में अपने दादा- दादी के साथ सोता था दादा जी उसका मन बहलाने के लिए सोते समय रोज रात को कोई न कोई कहानी सुनाया करते थे और उसका मन बहलाते थे जिस दिन विकास का पढ़ाई का काम जल्दी निपट जाता उस दिन वह जिद करके अपने दादा जी से कहानी सुनाने की जिद करता था
रोज की तरह एक दिन विकास का स्कूल का काम जल्दी निपट गया। वह रोज की तरह दादा से कहानी सुनने के लिए गया वह अपने दादा के साथ बिस्तर पर लेट गया। उनके पास बैठ कर पूछने लगा बताओ। दादा जी क्या गरीब बच्चों का कोई भविष्य नहीं होता है क्या उनको पढ़ाई करने का अधिकार नहीं है क्या उन्हें जिंदगी भर ठोकरें खानी पड़ती है क्या वह अपना भविष्य नहीं बना सकते है
दादाजी ने बड़े प्यार से पोते की पीठ थपथपाई फिर बोले बेटा आज ऐसा प्रश्न तुम्हारे दिमाग में अचानक क्यों आया है क्या कोई बात है
विकास ने अपने दादा को बताया कि राजू एक गरीब घर का लड़का है जब मैं स्कूल बस से छुट्टी के समय घर लौटता हूं तो बस मुझे लाल बत्ती चौराहे पर उतारती है ठीक तभी राजू भी कंधे पर बैग को टागे हुये सरकारी स्कूल से लौट रहा होता है वह झुग्गी झोपड़ी वाली बस्ती में रहता है आप तो जानते ही हैं वह बस्ती हमारी कॉलोनी के आखिरी सिरे पर है यह रास्ता हमारे घर के सामने से ही निकलता है वह मेरे साथ बातें करता हुआ यहां तक आता हैउसके मां-बाप बहुत ही गरीब है उसके घर की हालत बहुत खराब है उसे स्कूल में पढ़ने से हटा रहे है। उसे स्कूल से निकाल रहे हैं कि वह गरीब है आज वह अपनी बातें मुझसे शेयर कर रहा था और रो रहा था उसके दादा ने बोला बेटा उसका भविष्य तो खराब होकर ही रहेगा ठीक कह रहा हूं ना मैं दादा जी पूरी बात सुनते ही विकास की आंखों में आंसू आ गया और वह रोने लगा अब क्या होगा राजू का क्या दादा जी राजू अब कभी नहीं पढ़ सकता है क्या गरीब बच्चो का कोई भविष्य नहीं होता क्या उन्हें शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार नहीं है
उसके दादा ने बोला बेटा बिना पढ़े तो किसी भी बच्चे का भविष्य खराब हो सकता है मैं राजू के घर जाकर उसके माता-पिता को समझाने की कोशिश करुगा सरकारी स्कूल में बच्चा पढ़ाने से उनका भी तो फायदा होगा थोड़ी बहुत सहायता हम भी करेंगे यदि राजू कोशिश करें तो वह खुद भी अपना भविष्य खराब होने से बचा सकता है दादा जी ने विकास को भरोशा देते हुए समझाया
और ये भी पढ़े -घर और मकान में क्या अंतर है
आत्मविश्वाश क्या है एवं परिभाषा
विकास ने अपने दादा से बोला क्या गरीब का बच्चा बड़ा आदमी नहीं बन सकता है
क्या गरीब घर के बच्चे डी.सी डॉ. ,एस. पी ,टीचर, आदि जैसे पद पर नहीं पहुंच सकता है विकास इस बात को रोते हुए अपनी जिज्ञासा प्रकट की।
दादा जी को विकास का यह प्रश्न सुनकर बहुत ही खुशी हुयी और दादा ने बोला बेटा गरीब बच्चों को पढ़ाई करने में लगन या आकांक्षा जब जाए तो दुनिया की कोई स्कूल य विद्यायलय नहीं रोक सकता उसे शिक्षा ग्रहण करने में , इसके लिए वह पढ़ाई के प्रति सच्चे मन से परिश्रम में जुट जाएं। तो वह D. C और S. P, डॉक्टर., इंजीनियर ही नही ,बल्कि देश का राष्ट्रपति भी बन सकता है दादा की बात सुनकर विकास बहुत ही खुश हुआ
दादाजी ने विकास को समझाने के लिए एक कहानी सुनानी शुरू की बेटा या कहानी यूनान देश की है एथेंस शहर में एक बालक रहता था उसका नाम किलेथिन्स था किलेथिन्स बहुत ही गरीब था इतना गरीब था कि उसके पास पहनने के लिए अच्छे कपड़े तक नहीं थे वह हमेशा ही फटे- पुराने कपड़े पहने रहता था। ऐसा करना उसकी मजबूरी थी उसके माता-पिता बहुत ही गरीब थे उसके माता पिता इतना नहीं कमा पाते थे कि उसके लिए ढंग के कपड़े खरीद सके। और उसे पहना सके। हर प्रकार का भोजन खिला सके
किलेथिन्स ने दार्शनिक जीनो द्वारा चलाई जा रही पाठशाला में पढ़ाई करने के लिए प्रवेश लिया। जीनो की पाठशाला बहुत ही मशहूर थी वहां पढ़ने वाले छात्रों को प्रतिमा शुल्क चुकाना होता था। किलेथिन्स गरीब होने के बावजूद वह अपने स्कूल की फीस प्रतिमाह समय पर पर चुका देता था हालांकि वह पाठशाला में भी फटे -पुराने कपड़े ही पहनें रहता था
वह बहुत ही होनहार बच्चा था वह समय पर पाठशाला आता खूब मन लगाकर पढ़ाई करता था अपनी कक्षा में हर बार प्रथम स्थान प्राप्त करता था वह क्लास में हर चीज में फर्स्ट आता था धनी बच्चे उसका मजाक उड़ाते थे उसके कपड़ो को लेकर ,धनी बच्चों को उसेसे जलन होने लगी वह उसे नीचा दिखाने के लिए अलग अलग तरकीब बनाते रहते थे कि वह पाठशाला छोड़कर चला जाए परंतु उन बच्चों की यह इच्छा पूरी नहीं हुई किलेथिन्स पढ़ाई के अलावा किसी और बातों पर ध्यान नहीं देता था वह अपनी पढ़ाई में जुटा रहता था
दूसरों छात्रों ने किलेथिन्स के लिए षड्यंत्र रचा उन्होंने कहना शुरू कर दिया कि किलेथिन्स चोर है यहां- वहां से पैसे चुरा कर लाता है वह और पाठशाला का शुल्क चुका देता है धीरे-धीरे ऐसा माहौल बन गयाकी पाठशाला में सभी लोगों को लगने लगा की किलेथिन्स सच मे चोर है उसकी शिकायत शहर के हकीम से की गई, हकीम के द्वारा दंड सुनाए जाने से पहले किलेथिन्स ने प्रार्थना की कि उसे अदालत में 2 गवाहों को प्रस्तुत करने की अनुमति दी जाए हकीम ने उसकी बात सुनकर उसको अनुमति दी
किलेथिन्स का पहला गवाह था एक बाग का माली ,माली ने हकीम को बताया कि पाठशाला की छुट्टी होने के बाद किलेथिन्स उसके यहां आता है वहां कुएं से पानी निकाल कर उसके बाद के पौधों की सिंचाई करता है सभी पौधों में वह रोज पानी डालता है उसके बदले मै उसे कुछ पैसे दे देता है और यह अपने पाठशाला का शुल्क चुका देता है
किलेथिन्स का दूसरा गवाह थी एक बूढी औरत , बूढी औरत ने बताया कि वह घर में बिल्कुल अकेली है और वह खुद का सारा काम करने में बहुत ही असमर्थ है दिन निकलने से पहले ही किलेथिन्स उसके घर आता और उसके लिए चक्की चलाकर आटा पीस देता है उसके घर का काम करने में मदद करता था बदले में मै उसे कुछ पैसे दे देती हु हकीम ने किलेथिन्स की सारी बातें सुनकर उसे आरोप मुक्त कर देता है साथ ही प्रशंसा करते हुए उसे शाबाशी भी दे दी
सभी बच्चों ने किलेथिन्स से माफी मांगी
यह वही किलेथिन्स है जिसने बढ़ा होने पर बिखरे हुए यूनान को एक बनाया है यूनान उसका पहला शासक बना
कहानी समाप्त होते ही विकास ने अपने दादा से पूछा दादा जी यह कहानी मनगढ़ंत है यह असली है इस बात पर पूरी तरह से विश्वास नहीं हो रहा है
बेटा तुम तो पढ़े लिखे हो पुस्तकालय से यूनान के इतिहास की पुस्तक ले लो यह सारी जानकारी तुम्हें वहां मिल जाएगी तुम्हारे पापा का फोन भी इंटरनेट से जुड़ा है वहां से भी तुम किलेथिन्स उसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हो समझे या कहानी बिल्कुल असली है दादा जी ने विकास की पीठ पर हाथ रखते हुए उत्तर दिया विकास ने मन ही मन निश्चय कर लिया कि वह भी किलेथिन्स की तरह परिश्रमी और ईमानदार बनेगा

0 टिप्पणियाँ